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आचार्य महाब्राह्मण इंदोरीया गोत्र की संप्रुण जानकारी

*आचार्य महाब्राह्मण*की गोत्र *इंदौरिया जाति का इतिहास* इंदौरिया आदी गोड़ ब्राह्मण  गढ़ अयोध्या का निकास  कुलदेवी सारंग माता जी  मंदिर सारुण्ड गांव में पहाड़ी पर डाबला गांव के पास  कोटपूतली मे । गौत्र या नख  भारद्वाज  यजुर्वेद के ज्ञाता ,सूत्र काइतान । अयोध्या से नरवर् ,नरवर से भुवाना, भुवाना से पड़ीहारा ,पड़ीहारा से मालासी आया। *12 खेड़ा* मालासी से निकास 1   सांडवा  भारमाल जी आया संवत 1681. मे ठाकुर लालसिंह बिदावत के समय। 2.   बीदासर  नाथू जी आया संवत 1544 मे किशाल सिंह के समय। 3.   लोहा  धारू जी पन जी ,ज्ञान जी आया संवत 1650 मे ठाकुर देवीसिंह के समय। 4.    हरासर  कुशाल् जी आया संवत 1681 मे  5.    शोभासर्  जोगा जी आया संवत 1778 मे शिवदान सिंह के समय । 6.    चाड़वास  लालू जी आया संवत 1778 मे  7.   गोपालपुरा  तेजा जी आया संवत 1778मे ठाकुर उदय सिंह के समय । 8.   मेनासर  9 खुड़ी 10.   मलसीसर  11.     बंबू या दुस...

महापात्र ब्राह्मण

महापात्र ब्राह्मण उत्पत्ति= देश के आधार पे पंच गौर ब्राह्मण थे लेकिन कर्म के आधार पे 10 गौर ब्राह्मण थे= 1. गौड़ ब्राह्मण से= शर्मा महापात्र ब्राह्मण  2. सरस्वत ब्राह्मण से= आचार्या जोशी महापात्र ब्राह्मण  3. कानकुबज ब्राह्मण से= पाण्डेय तिवारी दुबे चौबे दीक्षित उपाध्याय मिश्रा महापात्र ब्राह्मण  4. मैथिल ब्राह्मण से= झा ठाकुर मिश्रा महापात्र ब्राह्मण  उत्कल ब्राह्मण से= त्रिपाठी पाठक दाश महापात्र ब्राह्मण  और जो गोत्र मूल प्रवर शाखा पंच गौर ब्राह्मण में हैं वहीं महापात्र ब्राह्मण में भी हैं  बिहार नेपाल झारखण्ड के झा ठाकुर मिश्रा महापात्र ब्राह्मण के गोत्र= शांडिल्य कश्यप वत्स भारद्वाज कौशिक पराशर मुद्गल गौतम उपमन्यु कौण्डिण्य कृष्णात्रेय स्वर्ण और भी गोत्र हैं और सभी गोत्र की अपनी कुल देवी देवता हैं और अलग अलग मूल हैं जैसे मेरा गोत्र= शांडिल्य हैं मूल=दिग्वैत् संदेपुर  ये मूल सिस्टम नॉर्थ बिहार और नेपाल के मधेश राज्य पे राजा हरिदेव सिंग का राज था उन्होने ब्राह्मण और कायस्थ को बाक़ी जातियों में शादी करने से बचाने के लिए लागू करा था तब मैथिल और महापात्...